top of page

बेवजह

Updated: Aug 11

बेवजह कुछ नहीं होता।

बेवजह ना तो बारिश होती है और ना ही शाखों से पत्ते झड़ते हैं |

बेवजह शब्द भी शायद बेवजह नहीं बना हैं।

बेवजह ना तो कोई रोता है और ना ही हँसता है।

ना रूठता है ना ही कोई किसी को मनाता है।

ना ही बेवजह किसी का कुछ छिन जाता है और ना ही कोई ऐसे ही सागर से मोती पा जाता है।

बस! हमे ऐसा लगता है…कभी कभी - सब बेवजह है।

शायद इसलिए की हम थोड़े ज़्यादा लापरवाह हो गए हैं या फिर वजह जानना ही नहीं चाहते ।

ऐसा भी हो सकता है हम वजह को बेवजह करार देकर इससे नज़रे चुराते है कि कहीं वजह सामने आ गई तो शायद फिर नज़रे उठा ना पाये ।

जो भी हो फिर भी ‘ बेवजह ’ कुछ तो है जो होता है और वो बेशक सच्चा प्यार है …. जो ना सिर्फ़ बेवजह होता है ; बेहद और बेहिसाब होने के साथ बेमिसाल भी होता है।❤️❤️

Mukta Kapur



Comments


bottom of page