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जी ले ज़िंदगी ज़रा ज़रा

29 minutes ago
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कुछ पीछे छूट रहा है

मुड़के अब तू क्या देख रहा है; क्या ढूँड रहा है ।

समेट ले यह यादें बीतें दिनों की ; कुछ खट्टी , कुछ मीठी।

देख! आगे आने वाला पल तेरी राह तक रहा है।

बना दे इसे भी खूबसूरत और हसीन अपनी शोख़ अदाओं से ।

सीख ले तू भी जीना ज़रा ज़रा इन लम्हों में।

ज़माने को भी बना दे दीवाना ; हो ऐसा जीने का अंदाज़ ।

ना कर सके जिसे ज़िंदगी भी नज़रअंदाज़

हो उसे भी तुझ पर नाज़ ; तारीफ़ में निकले बस यही अल्फ़ाज़…

आफ़रीन आफ़रीन ।





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