माना की रात काली है;
चाँद ने भी ना आने की ठानी है।
लगता है उसे भी मनानी दिवाली है ।
मालूम है उसको भी आज दीपो का त्योहार दिवाली है।
आज उतरनी मेरी माँ लक्ष्मीजी की सवारी है ;
रह ना जाये कोई कोना ख़ाली , सजा दो सब बारी बारी ।
हमने तो कर ली तैयारी है ;
अब आपकी बारी है ।
Wish you all a very happy and safe Deepawali.
Mukta Kapur
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